Bank Locker New Rules Explained (2026): Charges, Agreement, Liability & RBI Guidelines

Bank locker new rules explained 2026 covering locker charges, agreement, liability, and RBI guidelines in India

Introduction

बैंक लॉकर(Bank Locker)आपकी कीमती चीज़ें रखने के लिए सबसे सुरक्षित जगहों में से एक हैं सोना, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट, इंश्योरेंस पॉलिसी, वसीयत वगैरह। लेकिन पिछले कुछ सालों में, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने सिक्योरिटी, कस्टमर प्रोटेक्शन, ट्रांसपेरेंसी और लायबिलिटी इश्यू को बेहतर बनाने के लिए अपडेटेड नियम (2025–26/2026 तक लागू) पेश किए हैं। इस ब्लॉग में, हम आपको आसान भाषा में उन सभी नए नियमों के बारे में बताएंगे जिन्हें आपको जानना ज़रूरी है।

बैंक लॉकर(Bank Locker)को लंबे समय से सोने के गहने, ज़रूरी डॉक्यूमेंट, वसीयत, प्रॉपर्टी के कागज़ात और सर्टिफिकेट जैसी कीमती चीज़ें रखने के सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक माना जाता है। लाखों भारतीय बैंक लॉकर(Bank Locker)का इस्तेमाल यह मानकर करते हैं कि उनका कीमती सामान बैंक द्वारा पूरी तरह सुरक्षित है। हालाँकि, पहले बैंक की ज़िम्मेदारी, कस्टमर के अधिकार और नुकसान होने पर मुआवज़े को लेकर साफ़ जानकारी नहीं थी।

इन समस्याओं को हल करने और कस्टमर प्रोटेक्शन को बेहतर बनाने के लिए, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने बदले हुए और स्टैंडर्ड बैंक लॉकर(Bank Locker)नियम पेश किए। ये नियम, जो 2026 में भी लागू रहेंगे, ट्रांसपेरेंसी, अकाउंटेबिलिटी और बेहतर सिक्योरिटी पर फोकस करते हैं।

इस डिटेल्ड गाइड में, आप जानेंगे:

  • नए बैंक लॉकर(Bank Locker)नियम क्या हैं
  • ज़रूरी लॉकर एग्रीमेंट की ज़रूरतें
  • बैंक लॉकर(Bank Locker)चार्ज और किराए के नियम
  • बैंक लायबिलिटी और मुआवज़े की लिमिट
  • नॉमिनेशन और विरासत के नियम
  • आप लॉकर में क्या रख सकते हैं और क्या नहीं

अपने लॉकर को सुरक्षित रखने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स

Bank locker security system in India with secure vault and lockers

नए बैंक लॉकर(Bank Locker)नियम क्यों लाए गए?

पहले, बैंक लॉकर(Bank Locker) के नियम एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग-अलग होते थे। कई कस्टमर्स को साफ़ लिखा हुआ एग्रीमेंट नहीं दिया गया, और बैंक अक्सर चोरी, आग या फ्रॉड के मामलों में ज़िम्मेदारी लेने से मना कर देते थे। इससे विवाद और कानूनी उलझन पैदा हुई।

कस्टमर्स की सुरक्षा और बैंकों में काम करने के तरीकों को स्टैंडर्ड बनाने के लिए, RBI ने इन मकसदों के साथ नई लॉकर गाइडलाइंस शुरू की हैं:

  • कस्टमर्स के हितों की रक्षा करना
  • बैंक की ज़िम्मेदारी को साफ़ तौर पर बताना
  • लॉकर की सिक्योरिटी को बेहतर बनाना
  • लिखे हुए एग्रीमेंट के ज़रिए ट्रांसपेरेंसी लाना
  • लॉकर होल्डर्स के साथ सही बर्ताव पक्का करना

ये नियम भारत में काम करने वाले सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं, जिनमें पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर और विदेशी बैंक शामिल हैं।

ज़रूरी रिवाइज़्ड लॉकर एग्रीमेंट (सबसे ज़रूरी नियम)

नए नियमों के तहत, हर बैंक लॉकर(Bank Locker)होल्डर को अपने बैंक के साथ एक रिवाइज्ड लॉकर एग्रीमेंट पर साइन करना होगा।

नए लॉकर एग्रीमेंट में क्या-क्या शामिल है?

  • कस्टमर के अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ
  • बैंक के कर्तव्य और ज़िम्मेदारियाँ
  • वे शर्तें जिनके तहत बैंक नुकसान के लिए ज़िम्मेदार है
  • लॉकर ऑपरेशन और एक्सेस के नियम
  • नॉमिनेशन और सर्वाइवरशिप क्लॉज़
  • लॉकर तोड़ने का प्रोसेस

अगर आप एग्रीमेंट पर साइन नहीं करते हैं तो क्या होगा?

  • बैंक लॉकर(Bank Locker)एक्सेस पर रोक लगा सकता है या मना कर सकता है
  • लगातार नियम न मानने पर लॉकर फ्रीज़ किया जा सकता है
  • बहुत ज़्यादा गंभीर मामलों में, सही नोटिस के बाद लॉकर को सील किया जा सकता है

ज़रूरी: कस्टमर्स को परेशानी से बचने के लिए एग्रीमेंट और KYC की फॉर्मैलिटीज़ जल्द से जल्द पूरी कर लेनी चाहिए।

बैंक लॉकर(Bank Locker)शुल्क और किराया नियम (2026)

बैंक लॉकर(Bank Locker)का किराया लॉकर के साइज़, बैंक पॉलिसी और ब्रांच की जगह जैसी बातों पर निर्भर करता है।

भारत में लॉकर का सालाना अनुमानित किराया:

  • छोटा लॉकर: ₹1,500 – ₹3,000
  • मीडियम लॉकर: ₹3,000 – ₹6,000
  • बड़ा लॉकर: ₹6,000 – ₹10,000 या उससे ज़्यादा

दूसरे संभावित चार्ज:

  • लेट पेमेंट पेनल्टी
  • लॉकर तोड़ने का चार्ज (अगर चाबी खो जाए)
  • लॉकर किराए पर GST

कुछ मामलों में बैंक सिक्योरिटी के तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट या एडवांस किराया भी मांग सकते हैं।

बैंक लायबिलिटी और कम्पनसेशन रूल्स (100× रेंट रूल)

नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव बैंक लायबिलिटी की साफ़ परिभाषा है।

बैंक कब ज़िम्मेदार होता है?

अगर लॉकर का सामान इन वजहों से खो जाता है या खराब हो जाता है, तो बैंक ज़िम्मेदार होगा:

  • खराब सिक्योरिटी की वजह से चोरी या सेंधमारी
  • आग, धोखाधड़ी, या बिल्डिंग गिरना
  • बैंक स्टाफ की लापरवाही या गलत व्यवहार

आपको कितना मुआवज़ा मिलेगा?

  • ज़्यादा से ज़्यादा मुआवज़ा सालाना लॉकर किराए का 100 गुना होगा।

उदाहरण:
अगर सालाना लॉकर किराया ₹2,000 है, तो ज़्यादा से ज़्यादा मुआवज़ा = ₹2,00,000।

बैंक कब ज़िम्मेदार नहीं होता?

  • भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ (भगवान का किया हुआ काम)
  • ग्राहक की अपनी लापरवाही
  • लॉकर में रखी मना की गई चीज़ों की वजह से नुकसान
  • लॉकर का गलत इस्तेमाल या बिना इजाज़त चाबियों को शेयर करना

ध्यान दें: बैंक लॉकर(Bank Locker)इंश्योरेंस जैसा नहीं है। ज़्यादा कीमत वाली चीज़ों के लिए, अलग से इंश्योरेंस कराने की सलाह दी जाती है।

बैंक लॉकरों(Bank Locker)के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय

Better security measures for bank lockers including biometric access, CCTV surveillance, and dual control system

नए नियमों के तहत, बैंकों को लॉकर की सुरक्षा मजबूत करनी होगी।

ज़रूरी सुरक्षा उपायों में ये शामिल हैं:

  • लॉकर एरिया में CCTV निगरानी
  • लॉकर रूम में कंट्रोल्ड एक्सेस
  • लॉकर ऑपरेशन का सही रिकॉर्ड रखना
  • लॉकर इस्तेमाल का टाइम-स्टैम्प्ड लॉग

कई बैंक लॉकर(Bank Locker)एक्सेस होने पर SMS या ईमेल अलर्ट भी देते हैं, जिससे ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा बेहतर होती है।

बैंक लॉकर(Bank Locker)में क्या रखा जा सकता है और क्या नहीं

अलाउड आइटम:

  • सोना और ज्वेलरी
  • प्रॉपर्टी और लीगल डॉक्यूमेंट
  • इंश्योरेंस पेपर
  • फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें
  • वसीयत और सर्टिफिकेट

प्रोहिबिटेड आइटम:

  • कैश और करेंसी नोट
  • हथियार, गोला-बारूद, या एक्सप्लोसिव
  • ड्रग्स या गैर-कानूनी चीज़ें
  • खतरनाक या रेडियोएक्टिव मटीरियल

प्रोहिबिटेड आइटम स्टोर करने पर लॉकर एग्रीमेंट खत्म हो सकता है और लीगल एक्शन भी हो सकता है।

नामांकन और विरासत नियम (2026)

परिवारों की मुश्किल कम करने के लिए RBI ने नॉमिनेशन के महत्व पर ज़ोर दिया है।

नॉमिनेशन की सुविधा:

  • सिंगल और जॉइंट लॉकर के लिए उपलब्ध
  • लॉकर होल्डर की मौत के बाद नॉमिनी के लिए लॉकर का सामान क्लेम करना आसान हो जाता है

अगर कोई नॉमिनी नहीं है:

  • कानूनी वारिसों को एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे
  • यह प्रोसेस टाइम लेने वाला और मुश्किल हो जाता है

टिप: भविष्य में होने वाले झगड़ों से बचने के लिए लॉकर लेते समय हमेशा नॉमिनी रजिस्टर करें।

निष्क्रिय या अप्रयुक्त लॉकरों के लिए नियम

अगर कोई लॉकर लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होता है या किराया नहीं दिया जाता है, तो बैंक कार्रवाई कर सकते हैं।

बैंक प्रोसीजर में आमतौर पर ये शामिल हैं:

  • रिमाइंडर और नोटिस भेजना
  • जवाब देने के लिए पूरा समय देना
  • लॉकर खोलने से पहले एक ट्रांसपेरेंट प्रोसेस को फॉलो करना

लॉकर सिर्फ़ कस्टमर, नॉमिनी या कानूनी वारिस की मौजूदगी में ही खोला जाता है, और सही डॉक्यूमेंटेशन बनाए रखा जाता है।

अगर आप अपने लॉकर की चाबी खो देते हैं तो क्या करें

अगर लॉकर की चाबी खो जाए:

  • बैंक को तुरंत बताएं
  • एक लिखित एप्लीकेशन जमा करें
  • पहचान वेरिफिकेशन पूरा करें
  • आपके सामने लॉकर तोड़ा जाएगा
  • एक नया लॉक लगाया जाएगा

चार्ज:

बैंक और लॉकर के टाइप के आधार पर बैंक ₹2,000–₹5,000 या उससे ज़्यादा चार्ज कर सकते हैं।

अपने बैंक लॉकर(Bank Locker)को सुरक्षित रखने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स

Practical tips to keep your bank locker safe including insuring locker contents, regular visits, confidentiality, and safe access
  • लॉकर में रखे सामान की एक लिखी हुई लिस्ट रखें
  • कीमती सामान रखने से पहले उसकी फ़ोटो लें
  • महंगी ज्वेलरी के लिए इंश्योरेंस के बारे में सोचें
  • लॉकर को समय-समय पर ऑपरेट करें
  • बैंक के साथ अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट रखें
  • अपनी लॉकर की चाबी कभी भी बिना इजाज़त वाले लोगों के साथ शेयर न करें

पुराने नियम बनाम नए नियम (क्विक कम्पेरिजन)

FeatureOld RulesNew Rules (2026)
Locker agreementNot standardizedMandatory & standardized
Bank liabilityUnclearUp to 100× annual rent
SecurityLimitedCCTV & monitoring
NominationOften ignoredSimplified & promoted
TransparencyLowHigh

अनिवार्य संशोधित लॉकर समझौता

डेडलाइन 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ाई गई — हर लॉकर होल्डर को अपने बैंक के साथ एक रिवाइज्ड स्टैंडर्ड लॉकर एग्रीमेंट पर साइन करना होगा।
अगर आप साइन नहीं करते हैं, तो बैंक आपके लॉकर को फ्रीज कर सकते हैं या उस तक पहुंच देने से मना कर सकते हैं।

एग्रीमेंट में नया क्या है?

लायबिलिटी और कम्पेनसेशन पर साफ़ शर्तें

कस्टमर के अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ

मॉडर्न सिक्योरिटी और अलर्ट प्रोविज़न

एक्शन आइटम: डेडलाइन से पहले अपनी ब्रांच में जाएँ या ऑनलाइन/डिजिटल KYC पूरा करें।

बेहतर लॉकर सुरक्षा और निगरानी

नए नियमों के तहत:
बैंकों को फिजिकल सिक्योरिटी पक्की करनी होगी CCTV कवरेज, वॉल्ट में सुरक्षित एंट्री।
कई बैंक हर बार आपका लॉकर खुलने पर SMS/ई-मेल अलर्ट भेजते हैं।
फ्रॉड रोकने के लिए मज़बूत KYC और वेरिफिकेशन।

यह क्यों ज़रूरी है: आपको लॉकर के सभी ऑपरेशन के बारे में नोटिफ़िकेशन मिलता है इसलिए बिना इजाज़त के एक्सेस को ट्रैक करना आसान होता है।

बैंक देयता और मुआवजा

ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव!

अगर बैंक की लापरवाही (जैसे खराब सिक्योरिटी की वजह से चोरी या बैंक स्टाफ की धोखाधड़ी) की वजह से आपके लॉकर का सामान खो जाता है, तो बैंक को आपको हर्जाना देना होगा।
मुआवज़ा सालाना लॉकर किराए का 100 गुना तक है।

उदाहरण:
सालाना किराया ₹2,000 → ज़्यादा से ज़्यादा ज़िम्मेदारी ₹2,00,000

ज़रूरी अपवाद (कोई मुआवज़ा नहीं):

  • बाढ़, भूकंप जैसी कुदरती आफ़तें (भगवान का किया हुआ काम)
  • आपकी अपनी लापरवाही (चाबी खो जाना या लॉकर का काम न करना)
  • रखी गई मना की गई चीज़ों की वजह से नुकसान

इसका मतलब है कि बैंक लॉकर(Bank Locker)इंश्योरेंस नहीं है — यह फिजिकली सुरक्षा देता है, लेकिन वैल्यू प्रोटेक्शन लिमिटेड है।

आप क्या स्टोर कर सकते हैं और क्या नहीं

अलाउड

  • ज्वेलरी और कीमती सामान
  • प्रॉपर्टी डीड
  • इंश्योरेंस/फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट
  • सर्टिफिकेट

अलाउड नहीं

  • कैश और करेंसी
  • हथियार
  • ड्रग्स, एक्सप्लोसिव
  • खतरनाक चीज़ें

रोकी हुई या खतरनाक चीज़ें रखने पर लॉकर एग्रीमेंट खत्म हो सकता है।

नामांकन और उत्तरजीविता नियम

RBI के 2025 के निर्देशों के तहत, बैंकों को नॉमिनेशन सुविधा को आसान बनाना होगा और ग्राहकों को इसके बारे में साफ़-साफ़ बताना होगा।
जब लॉकर मालिक की मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनेशन मदद करता है नॉमिनी कीमती सामान पर जल्दी दावा कर सकता है।

टिप: हमेशा एक नॉमिनी रजिस्टर करें और सर्वाइवरशिप क्लॉज़ (खासकर जॉइंट लॉकर के लिए) पर विचार करें ताकि वारिसों को कानूनी देरी का सामना न करना पड़े।

इनैक्टिव लॉकर्स और डेडलाइन को हैंडल करना

बैंक सभी लॉकरों को नए स्टैंडर्ड एग्रीमेंट के हिसाब से अपडेट कर रहे हैं, इस पर साइन करने में देर न करें।

अगर कोई लॉकर सालों तक इस्तेमाल नहीं होता या काम नहीं करता, तो बैंक स्टैंडर्ड प्रोसेस के हिसाब से कार्रवाई कर सकते हैं।

अपनी कीमती चीज़ों को सुरक्षित रखने के लिए एक्स्ट्रा टिप्स

  • फ़ोटो के साथ सामान की लिस्ट बनाएं
  • ज़्यादा कीमत वाली चीज़ों के लिए इंश्योरेंस के बारे में सोचें (होम/लॉकर इंश्योरेंस)
  • समय-समय पर अपने लॉकर पर जाएं और उसे ऑपरेट करें
  • बैंक के साथ सभी पर्सनल कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट रखें

2026 के लिए अंतिम सारांश

Final summary for 2026 highlighting bank locker rules, enhanced security measures, and customer safety guidelines in India
FeatureOld RulesNew Rules (2025-26/2026)
Locker AgreementVaries by bankStandard RBI-mandated agreement
LiabilityBank often not liableUp to 100x annual rent if negligence
SecurityBasicCCTV, SMS/Email alerts, KYC
NominationCustomer optionSimplified & mandated awareness
Prohibited ItemsAlready restrictedEnforcement stricter

लॉकर होल्डर्स के लिए ज़रूरी कदम

लॉक …

  • 31 दिसंबर 2025 से पहले बदले हुए लॉकर एग्रीमेंट पर साइन करें
  • KYC और कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट करें
  • नॉमिनी/सर्वाइवरशिप क्लॉज़ जोड़ें
  • इन्वेंट्री + इंश्योरेंस लें (ऑप्शनल लेकिन रिकमेंडेड)

FAQs

प्रश्न 1. क्या लॉकर इंश्योरेंस ज़रूरी है?
नहीं, लेकिन महंगी चीज़ों के लिए यह बहुत ज़्यादा रिकमेंड किया जाता है।

प्रश्न 2. क्या बैंक लॉकर(Bank Locker)का किराया बढ़ा सकते हैं?
हाँ, लेकिन यह सही होना चाहिए और पहले से बताया जाना चाहिए।

प्रश्न 3. क्या कोई बैंक लॉकर(Bank Locker)सुविधा देने से मना कर सकता है?
हाँ, उपलब्धता और बैंक पॉलिसी के आधार पर।

प्रश्न 4. अगर लॉकर का किराया नहीं दिया गया तो क्या होगा?
बैंक सही नोटिस के बाद लॉकर में आने-जाने पर रोक लगा सकता है और आखिर में उसे तोड़ सकता है।

प्रश्न 5. क्या सभी नुकसान के लिए मुआवज़े की गारंटी है?
नहीं, मुआवज़ा सिर्फ़ बैंक की लापरवाही के मामलों में ही लागू होता है।

Conclusion

बैंक लॉकर(Bank Locker)के नए नियम (2026) ग्राहकों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। ज़रूरी एग्रीमेंट, साफ़ तौर पर तय लायबिलिटी, बेहतर सिक्योरिटी और आसान नॉमिनेशन प्रोसेस के साथ, बैंक लॉकर(Bank Locker)अब पहले से ज़्यादा सुरक्षित और ट्रांसपेरेंट हैं।

अगर आप लॉकर होल्डर हैं, तो पक्का करें कि आप:

  • रिवाइज्ड लॉकर एग्रीमेंट पर साइन करें
  • एक नॉमिनी जोड़ें
  • अपना KYC अपडेट रखें
  • कीमती चीज़ों के लिए इंश्योरेंस के बारे में सोचें

जानकारी होने से यह पक्का होता है कि आपकी कीमती चीज़ें सुरक्षित रहें और आपके अधिकार सुरक्षित रहें।

Disclaimer : यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। बैंक के खास नियम अलग-अलग हो सकते हैं। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले हमेशा अपनी बैंक ब्रांच से डिटेल्स कन्फ़र्म कर लें।

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