Introductions
भारत में रोज़ाना चांदी के रेट(Silver rate in india)पर एक गाइड का यह इंट्रोडक्शन, देश में चांदी के कल्चरल और इकोनॉमिक महत्व पर रोशनी डालता है, और बचत और इंडस्ट्री में इसकी भूमिका पर भी ध्यान देता है। इस गाइड में आज की कीमतें, मार्केट ड्राइवर, पुराने ट्रेंड, इन्वेस्टमेंट ऑप्शन और रिस्क के बारे में बताया जाएगा।

भारत में आज चांदी का भाव(Silver Rate Today)
आज, 23 जनवरी 2026 को भारत में चांदी की कीमत लगभग(Silver Rate Today) ₹3,24,900 प्रति किलोग्राम है। कीमत बहुत बदलती रहती है, जिस पर इंटरनेशनल मार्केट रेट, रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट और बड़ी इंडस्ट्रियल डिमांड का असर पड़ता है।
| Gram | Today’s Rate (INR) | Yesterday’s Rate (INR) |
|---|---|---|
| 1 gram | ₹304.28 | ₹287.02 |
| 10 grams | ₹3,042.80 | ₹2,870.18 |
| 100 grams | ₹30,428.03 | ₹28,701.84 |
| 1 kilogram | ₹3,04,280.26 | ₹2,87,018.39 |
ये रेट्स सिर्फ़ कुछ ही हैं और लोकल टैक्स और मेकिंग चार्ज की वजह से अलग-अलग शहरों और डीलरों के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
भारत में चांदी की कीमतों(Silver rate in india)को बढ़ाने वाले मुख्य कारण
भारतीय बाज़ार में चांदी की कीमतें (Silver rate in india)ग्लोबल और घरेलू फ़ैक्टर्स का एक मुश्किल तालमेल हैं। इन्वेस्टर्स के लिए इन ड्राइवर्स को समझना बहुत ज़रूरी है।
- ग्लोबल मार्केट की कीमतें: घरेलू कीमतों पर इंटरनेशनल स्पॉट चांदी की कीमतों का(Silver rate in india)बहुत ज़्यादा असर पड़ता है। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत में रेट्स पर पड़ता है।
- करेंसी में उतार-चढ़ाव: भारतीय रुपया और US डॉलर के बीच एक्सचेंज रेट एक अहम भूमिका निभाता है। जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो भारत में इंपोर्टेड चांदी महंगी हो जाती है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं, भले ही इंटरनेशनल कीमतें स्थिर रहें।
- इंडस्ट्रियल डिमांड: यह अभी एक बड़ा ड्राइवर है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs), और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी में चांदी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से इंडस्ट्रियल कंजम्प्शन में बढ़ोतरी हुई है और मार्केट में घाटा होने का अनुमान है।
- महंगाई से बचाव और जियोपॉलिटिकल तनाव: ज़्यादा महंगाई और ग्लोबल अस्थिरता (जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष के चल रहे असर) के समय, निवेशक अक्सर चांदी जैसी कीमती धातुओं को ‘सेफ हेवन’ एसेट के तौर पर देखते हैं, जिससे मांग बढ़ती है।
- सरकारी नीतियां: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी और दूसरे रेगुलेटरी बदलाव घरेलू बाज़ार में चांदी की सप्लाई और कीमत(Silver rate in india)पर असर डाल सकते हैं।
- सप्लाई की कमी: मार्केट में स्ट्रक्चरल सप्लाई की कमी देखी जा रही है, और अनुमान है कि यह ट्रेंड जारी रहेगा, जिससे कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
ऐतिहासिक मूल्य रुझान (2018-2026)
पिछले कुछ सालों में चांदी में काफी उतार-चढ़ाव और अच्छा रिटर्न दिखा है। 2018-2019 के आसपास, कीमतें ₹40,000 प्रति kg के आसपास रहीं। महामारी के बाद, कीमतें लगातार बढ़ने लगीं, और 2025 के मध्य तक लगभग ₹114,000 प्रति kg तक पहुंच गईं।
साल 2025 में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई, जिसमें कीमतें ₹2.4 लाख प्रति kg से ज़्यादा हो गईं और आखिरकार जनवरी 2026 में ₹3 लाख/kg के रिकॉर्ड लेवल को पार कर गईं। यह ज़बरदस्त उछाल मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की बड़ी कमी की वजह से आया। पिछले पांच सालों में, चांदी ने 150% से ज़्यादा का शानदार टोटल रिटर्न दिया है।

2026 के लिए चांदी की कीमत का अनुमान(Silver rate in india)
2026 में चांदी के लिए मार्केट सेंटिमेंट बुलिश बना हुआ है, हालांकि एक्सपर्ट्स को लगातार वोलैटिलिटी की उम्मीद है।
- पॉजिटिव अनुमान: लगातार स्ट्रक्चरल कमी और सोलर और EV सेक्टर से ज़बरदस्त डिमांड के कारण, कुछ अनुमानों के मुताबिक 2026 के आखिर तक कीमतें ₹3.80 लाख से ₹4.60 लाख प्रति kg के बीच पहुँच जाएँगी।
- कम अनुमान: दूसरे एनालिस्ट ₹2.4 लाख से ₹3.5 लाख प्रति kg की रेंज का सुझाव देते हैं, जिससे साल भर में 16% से 70% के बीच रिटर्न की उम्मीद है, जो शायद सोने से बेहतर परफॉर्म करेगा।
- शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी: मार्केट मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा को लेकर बहुत सेंसिटिव है, जैसे US जॉब्स के नंबर और इंटरेस्ट रेट में कटौती के बारे में फेडरल रिजर्व के सिग्नल, जिससे शॉर्ट-टर्म प्राइस में तेज़ उतार-चढ़ाव हो सकता है।
भारत में चांदी(Silver rate in india)में निवेश करने के तरीके
भारत में निवेशकों के पास अपने पोर्टफोलियो में चांदी जोड़ने के कई रास्ते हैं, जिनमें से हर एक के अपने फायदे हैं।
- फिजिकल सिल्वर: सबसे पारंपरिक तरीके में सिक्कों, बार या ज्वेलरी के रूप में सिल्वर खरीदना शामिल है।
- फायदे: टैंजिबल एसेट, सुरक्षा का एहसास देता है।
- नुकसान: सुरक्षित स्टोरेज की ज़रूरत (जैसे, बैंक लॉकर), शुद्धता की चिंता (हॉलमार्क वाले प्रोडक्ट पक्का करें), और ज्वेलरी पर ज़्यादा “मेकिंग चार्ज” लगने की संभावना।
सिल्वर ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स): फिजिकल स्टोरेज की परेशानी के बिना चांदी में निवेश करने का एक मॉडर्न, डिजिटल और ट्रांसपेरेंट तरीका।
- फायदे: ज़्यादा प्योरिटी (कम से कम 99.9%), कोई स्टोरेज कॉस्ट नहीं, स्टॉक्स की तरह एक्सचेंज पर खरीदना और बेचना आसान, मेटल को बिना छुए चांदी की कीमतों का पता चलता है।
- नुकसान: मार्केट में उतार-चढ़ाव और ट्रैकिंग में गड़बड़ी हो सकती है।
- उदाहरण: आप ब्रोकर के ज़रिए निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF, या SBI सिल्वर ETF जैसे ऑप्शन में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
- डिजिटल सिल्वर: अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलता है, जिससे छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट किए जा सकते हैं। SEBI ने संभावित जोखिमों के कारण ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के बारे में सावधानी जारी की है।
- सिल्वर फ्यूचर्स: मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) जैसे एक्सचेंज पर कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग करके भविष्य की तारीख के लिए कीमत लॉक कर लें। यह ज़्यादा मुश्किल है और इसमें ज़्यादा रिस्क है।

Conclusion
भारत और दुनिया भर में चांदी का बाज़ार एक अहम मोड़ पर है। क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन, स्ट्रक्चरल सप्लाई की कमी, और सेफ़-हेवन एसेट के तौर पर इन्वेस्टर की लगातार दिलचस्पी से चलने वाले मज़बूत लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स के साथ, चांदी का भविष्य अच्छा दिख रहा है।
हालांकि इसकी अंदरूनी वोलैटिलिटी का मतलब है कि कीमतों में तेज़ी से उतार-चढ़ाव हो सकता है, जैसा कि हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद कुछ सिल्वर ETF में 20% की गिरावट में देखा गया, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में सोने की तुलना में इसमें अभी भी काफी बढ़त की संभावना है।
इन्वेस्टर्स के लिए, पर्सनल रिस्क लेने की क्षमता पर ध्यान से सोचना और इन्वेस्टमेंट के तरीकों में बदलाव करना, और शायद फिजिकल सिल्वर और ETF जैसे डिजिटल ऑप्शन, दोनों का इस्तेमाल करना, डायनामिक सिल्वर मार्केट में एक समझदारी वाली स्ट्रैटेजी है।
FAQs
1.चांदी की कीमत(Silver rate in india)हर दिन क्यों बदलती है?
इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई और डिमांड के बदलते नेचर की वजह से चांदी का प्राइस रोज़ बदलता है। इस पर इंडस्ट्रियल डिमांड (इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल), ग्लोबल इकोनॉमिक हालात, करेंसी में उतार-चढ़ाव (खासकर USD-INR एक्सचेंज रेट), और जियोपॉलिटिकल टेंशन के दौरान इन्वेस्टर का सेंटिमेंट जैसे फैक्टर्स का असर पड़ता है।
2.क्या 2026 में चांदी एक अच्छा निवेश है?
मौजूदा मार्केट एनालिसिस के अनुसार, 2026 चांदी में निवेश के लिए अच्छा साल लग रहा है। सप्लाई में भारी कमी और क्लीन एनर्जी सेक्टर (सोलर, इलेक्ट्रिक गाड़ियां) से ज़बरदस्त डिमांड से कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों को सोने की तुलना में इसकी ज़्यादा वोलैटिलिटी का ध्यान रखना चाहिए।
3.फिजिकल सिल्वर और सिल्वर ETF में क्या अंतर है?
फिजिकल सिल्वर का मतलब है सिक्के और बार जैसी टैंजिबल संपत्ति, जिन्हें आपको सुरक्षित रूप से स्टोर करना चाहिए। सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) डिजिटल इन्वेस्टमेंट हैं जो कस्टोडियन के पास रखे फिजिकल सिल्वर को दिखाते हैं। ETF ज़्यादा प्योरिटी, ज़ीरो स्टोरेज झंझट, और आसान लिक्विडिटी (एक्सचेंज पर खरीदना/बेचना) देते हैं, जबकि फिजिकल सिल्वर मेटल के मालिक होने की पक्की सिक्योरिटी देता है।
4.मैं जो चांदी खरीदता हूं उसकी शुद्धता कैसे जांच सकता हूं?
फिजिकल चांदी के लिए हमेशा हॉलमार्क देखें। चांदी की चीज़ों के लिए स्टैंडर्ड हॉलमार्क प्योरिटी लेवल बताता है (जैसे, “999” का मतलब है 99.9% प्योर चांदी)। जाने-माने डीलर और मिंट बार और सिक्कों के लिए असली होने का सर्टिफिकेट देते हैं।
5.क्या मेरे शहर में चांदी की कीमत नेशनल रेट से अलग है?
हां, लोकल कीमतें थोड़ी अलग हो सकती हैं। नेशनल रेट एक एवरेज बेंचमार्क है। शहर के हिसाब से कीमतों में अक्सर लोकल टैक्स (जैसे GST), ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और खास डीलर मार्जिन शामिल होते हैं, जिससे अलग-अलग जगहों पर थोड़ा-बहुत फर्क आ सकता है।
Disclaimer : दी गई जानकारी सिर्फ़ एजुकेशनल मकसद के लिए है, फाइनेंशियल सलाह के लिए नहीं। चांदी की कीमतें (Silver rate in india)अस्थिर हैं। इन्वेस्ट करने से पहले किसी फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। इस जानकारी के आधार पर किए गए इन्वेस्टमेंट के फैसलों के लिए लेखक और पब्लिशर ज़िम्मेदार नहीं हैं।
